Complete traditional aarti. The most widely sung aarti of Lord Shiva — praising him as Omkara, the three-eyed auspicious lord.
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Anuradha Paudwal · Om Jai Shiv Omkara
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पाठ · Text
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥
दो भुज चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता, त्रिभुवन जन मोहे॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाल धारी।
त्रिपुरारी कर माला, श्वेत व्याली धारी॥
श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादिक शेषनाग, सुमन रज संगे॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र त्रिशूल धरता।
शुभकारी गदा धारी, जग पालन करता॥
सुखदाता दुखहर्ता, सुख करणी दुर्गा।
जो कोई ध्यान धरे, शिव की अर्चा॥
ऋषि मुनि यक्ष किन्नर, ध्यावत रहैं।
मन क्रम वचन से, जो कोई गावै॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत संतत प्रतिपाला॥
हरिचन्द्र त्रिशूलधारी, शिव शंकर भोला।
पार्वती पति परमेश्वर, नंदीश्वर सोला॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
Meaning
Complete aarti of Lord Shiva as Omkara. It praises Brahma–Vishnu–Sadashiva in one form, the bull mount, ash and serpent ornaments, the trident, and Shiva–Parvati together as protectors of the three worlds.