व्रत कथा संग्रह · विष्णु जी

एकादशी व्रत कथा

Ekadashi Vrat Katha

Deity
Vishnu
Tradition / author
Padma Purana / popular Vaishnava tradition
When to recite
Every Ekadashi (11th lunar day); especially Vaikunta & Mokshada Ekadashi

Complete traditional vrat katha. The fortnightly vow dedicated to Vishnu — fasting, japa, and listening to the katha of Ekadashi Devi.

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Ekadashi Vrat Katha · Hindi

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पाठ · Text

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री विष्णवे नमः ॥
एकादशी व्रत कथा — हरिभक्ति का पवित्र व्रत।

एकादशी तिथि भगवान विष्णु को विशेष प्रिय है। इस दिन भक्त उपवास रखकर हरि-स्मरण, कथा-श्रवण और नाम-जप करते हैं। वर्ष में चौबीस एकादशियाँ आती हैं।

कथा कहते हैं कि एक समय पाप-पुरुष नामक दुष्ट शक्ति ने पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ाया। देवताओं ने विष्णु की स्तुति की। भगवान ने अपनी योग-निद्रा से एक दिव्य शक्ति प्रकट की।

वह शक्ति एकादशी देवी के रूप में जानी गई। उसने पाप-पुरुष का नाश किया। तभी से एकादशी तिथि हरिभक्तों के लिए मोक्ष-दायिनी मानी गई।

पद्मपुराण और अन्य वैष्णव परंपराओं में एकादशी को विष्णु-प्रिय दिन कहा गया है। इस दिन अन्न-त्याग और हरि-कथा का विशेष माहात्म्य है।

व्रत विधि: दशमी को सात्त्विक भोजन कर नियम लें। एकादशी को यथाशक्ति निर्जला अथवा फलाहार रखें। झूठ, क्रोध और हिंसा से दूर रहें।

दिन भर विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत कथा, अथवा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें। मंदिर में दर्शन अथवा घर पर तुलसी-शालिग्राम पूजा करें।

रात को जागरण अथवा शांत हरि-स्मरण करें। द्वादशी को विधिपूर्वक पारण करें — पहले विष्णु को नैवेद्य अर्पित कर प्रसाद ग्रहण करें।

विशेष एकादशियाँ — जैसे निर्jala, वैकुण्ठ, मोक्षदा — अधिक पुण्यमयी मानी जाती हैं; पर प्रत्येक एकादशी हरि-कृपा का द्वार है।

फलश्रुति: एकादशी व्रत से पाप क्षय, मन की शुद्धि, वैराग्य और विष्णु-लोक की प्राप्ति की कामना कही गई है। गृहस्थ भी संयम से परमार्थ का मार्ग पाते हैं।

जो भक्त श्रद्धा से एकादशी रखते हैं, उनके घर में शांति रहती है और हरि उनका कल्याण करते हैं।
॥ जय श्री राम ॥ जय श्री कृष्ण ॥

Meaning

Ekadashi is dear to Vishnu. The popular telling describes Ekadashi Devi destroying the force of sin. Devotees fast, chant the Lord’s names, hear Hari-katha, and break the fast on Dwadashi after offering food to Vishnu — seeking purity of mind and divine grace.

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