चालीसा संग्रह · देवी जी

दुर्गा चालीसा

Durga Chalisa

Tradition / author
Traditional
When to recite
Navaratri, Fridays, during hardship and protection vows

Complete traditional chalisa. Forty verses to Durga — the fierce compassionate mother who ends fear.

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Anuradha Paudwal · Durga Chalisa

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पाठ · Text

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख मंगलकारी। त्रिभुवन तारा तुम्हारी॥
कंकण अंग विभूषण राजै। मातु दया दृष्टि सब पर छाजै॥

ज्वाला रूपी अंग बिराजै। लोचन लाल भृकुटि विकराजै॥
भुजा चार अति शोभित सोहे। खड्ग खप्पर अरि दल मोहे॥

महिषासुर पर गदा चलावै। रक्त बीज को खंडन करवै॥
शुंभ निशुंभ असुर संहारे। धूम्रलोचन नैनन मारे॥

चंड मुंड दोनो संहारे। रक्त चंडिका रूप उतारे॥
चामुंडा कालिका कहावै। भद्रकाली जग में गावै॥

अन्नपूर्णा जगदंबे माता। वैष्णवी कमला सुखदाता॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम ही। दुर्गा भवानी जग में रमी॥

पार्वती गिरिजा नाम धरावै। शैलापुत्री रूप कहावै॥
ब्रह्मचारिणी चंद्रघंटा। कुष्मांडा स्कंदमाता ममता॥

कात्यायनी कालरात्रि रूपा। महागौरी सिद्धिदात्री अनुपा॥
नवदुर्गा नव रूप तुम्हारे। नवरात्रि में जग नमन तुम्हारे॥

कामाख्या काली कालीघाट। वैष्णो देवी ज्वालामुखी घाट॥
चिन्तामणि तुलजा भवानी। अंबाजी महालक्ष्मी रानी॥

जो कोई दुर्गा चालीसा गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
पुत्र हीन की कामना पूरी। होय सिद्ध अरु बुद्धि हजूरी॥

रोग दोष संकट सब नासैं। जो यह पाठ करै उर लासैं॥
शत्रु मित्र होय सब सनेही। मातु कृपा ते दुख नहिं केही॥

धन धान्य सुख संपति आवै। दारिद्र दोष न निकटहि जावै॥
भय निवारण करुणा कंदा। दुर्गा चालीसा फल अनंदा॥

अष्टमी नवमी जो व्रत राखै। मातु कृपा ते मुक्तिहि भाखै॥
कनक थाल में आरती उतारै। मातु प्रसन्न होय सुख कारै॥

नमो नमो जगदंबे माता। नमो नमो दुख हरणी दाता॥
तुलसी दास कहै कर जोरी। मातु चरन मन बसि मोरी॥

शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी। चंद्रघंटा कुष्मांडा रानी॥
स्कंदमाता कात्यायनी। कालरात्रि महागौरी जानी॥

सिद्धिदात्री नवम रूपा। नवरात्रि पूजा अनुरूपा॥
श्री यंत्र पूजन जो करई। मातु कृपा सब दुख हरई॥

देवी महात्म्य पाठ करैया। सप्तशती फल नित बरैया॥
दुर्गा सप्तशती जो गावै। भय रोग शोक नसावै॥

चंडी पाठ करै जो कोई। शत्रु नाश अरु सुखहि होई॥
अर्गला कीलकं पाठ करै। विघ्न बाधा सब दूर धरै॥

कन्या पूजन विधि जो मानै। मातु प्रसन्न होय सुख जानै॥
अष्टमी हवन जो करई। नवमी पारण फल उर भरई॥

जय दुर्गे दुर्गति हारिणी। जय अम्बे भव भय तारिणी॥
जय जगदंबे जग जननी। जय करुणामयि दुख हरनी॥

सिंह वाहिनी खड्ग धरैया। असुर दलन भक्तन तरैया॥
रक्तदंतिका श्मशान वासी। भद्रकाली जग उर बिलासी॥

विंध्यवासिनी नाम तिहारा। कामख्या गुह्येश्वरी प्यारा॥
वैष्णोदेवी त्रिकुटा वासी। ज्वालामुखी अग्नि प्रकाशी॥

तुलजापुर भवानी माता। महालक्ष्मी कोल्हापुर दाता॥
अंबाजी गढ़ में बिराजै। मीनाक्षी मदुरै समाजै॥

कामाक्षी कांची बिराजै। विशालाक्षी काशी छाजै॥
चामुंडा मैसूर कहावै। संतोषी माँ जग सुखदावै॥

मातु चरन उर धरै जो कोई। भव सागर तरि जाय न होई॥
नमो नमो जगदंबे प्यारी। नमो नमो दुख हरन हारी॥

॥ दोहा ॥
दुर्गा चालीसा जो पढ़ै, प्रेम सहित कर ध्यान।
मातु कृपा ते सब दुख हरै, होय भक्त कल्याण॥

Meaning

Complete Durga Chalisa — forms of the Goddess (Navadurga, Kali, Chamunda), famous peethas, Navaratri vow fruits, and closing doha.

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