चालीसा संग्रह · विष्णु जी

विष्णु चालीसा

Vishnu Chalisa

Deity
Vishnu
Tradition / author
Traditional
When to recite
Ekadashi, Thursdays, daily Vaishnava japa

Complete traditional chalisa. Forty verses honouring Vishnu as protector of dharma and refuge of devotees.

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Vishnu Chalisa with lyrics

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पाठ · Text

जय जय श्रीपति कमला पति। दीनन के तुम हो घर गती॥
शंकर सेष महेश गुन गावत। नारद आदि मुनीश्वर ध्यावत॥

सनकादिक ध्यान लगावहीं। धरनि ध्याइ पटतर न पावहीं॥
जय जय अयोध्यापति रघुराई। जय जय मथुरापति कन्हाई॥

जय जय द्वारिकाधीश कहाई। जय जय जगन्नाथ गोसाई॥
जय जय बद्रिकाश्रमवासी। जय जय वेंकटेश विलासी॥

जय जय श्री रंगाधिप स्वामी। जय जय पद्मनाभ नामी॥
नारायण हरि विष्णु कहावै। लक्ष्मीपति जग पालन करै॥

शंख चक्र गदा पद्म धरैया। पीताम्बर रुचिरांग करैया॥
गरुड़ासन पर राज बिराजै। भक्तन के मन कामना साजै॥

मत्स्य कूर्म वराह कहावै। नृसिंह वामन परशुराम गावै॥
राम कृष्ण बुद्ध कल्कि रूपा। दश अवतार जगत अनुरूपा॥

सत्य युग त्रेता द्वापर गावै। कलियुग में नाम आधार कहावै॥
राम नाम अवलंब जो गावै। भव निधि पार उतारहि आवै॥

कृष्ण नाम जपै जो कोई। जन्म जन्म के दुख नहिं होई॥
विष्णु सहस्रनाम जो गावै। पाप ताप सब दूरहि जावै॥

तुलसी तुलसी दास पुकारै। श्रीपति चरणन शीश नवावै॥
अन्नपूर्णा लक्ष्मी संग सोहे। जगत जननी करुणा मोहे॥

शेषनाग शय्या पर सोवैं। लक्ष्मी चरन दबाय न जोवैं॥
क्षीर सागर मध्य बिराजै। भक्त दुख हरि सुखद समाजै॥

जो कोई विष्णु चालीसा गावै। मन कामना सिद्धहि आवै॥
रोग शोक दारिद्र नसावै। ज्ञान भक्ति वैराग्य बढ़ावै॥

पुत्र पौत्र सुख संपति देई। शत्रु मित्र सब होय सनेही॥
भय निवारण करुणा कंदा। विष्णु चालीसा फल अनंदा॥

एकदशी व्रत जो नर राखै। विष्णु लोक निश्चय भाखै॥
तुलसी पत्र चढ़ावै जोई। विष्णु प्रसन्न होय सुख होई॥

शालिग्राम पूजा जो करई। सब पाप नसै भक्ति उर भरई॥
गंगा यमुना सरस्वती स्नान। विष्णु भक्ति करै कल्याण॥

जय जय श्रीपति जग के ईश। सब पर तुम्हरी रहे जगदीश॥
जो यह पढ़ै विष्णु चालीसा। होय सिद्ध मन कामना ईशा॥

गरुड़ गमन अति शीघ्र करैया। भक्त पुकार सुनत ही धैया॥
सुदर्शन चक्र अरि दल मारे। पद्मनाभ जग पालन हारे॥

लक्ष्मी संग राजसिंहासन। भक्तन कष्ट हरन के आसन॥
शंख नाद से पाप नसावै। चक्र घुमाय असुर दल भावै॥

गदा पद्म कर शोभा न्यारी। पीत वसन उर वनमाला धारी॥
कौस्तुभ मणि उर बिराजै। श्रीवत्स चिह्न शोभा साजै॥

वैकुण्ठ धाम अति सुखदाई। नित्य लीला जहँ रहै सुहाई॥
गोलोक वृंदावन भी गावै। द्वारिका अयोध्या जसु छावै॥

तिरुपति बालाजी कहावै। भक्तन मनोरथ पूर्ण करावै॥
बद्रिकाश्रम नारायण सोहे। जगन्नाथ पुरी महिमा मोहे॥

रंगनाथ श्रीरंगम वासी। पद्मनाभ अनंतशयन दासी॥
द्वारकाधीश कृष्ण कहावै। विट्ठल पंढरीराव गावै॥

तुलसी माला जपै जो कोई। विष्णु भक्ति उर में होई॥
शालिग्राम जल अर्पण करई। सब पाप कटैं भक्ति उर भरई॥

एकादशी पारणा विधि मानै। द्वादशी को अन्न ग्रहण जानै॥
आमलकी एकादशी जो राखै। वैकुण्ठ प्रवेश निश्चय भाखै॥

गीता ज्ञान अर्जुन को दीन्हा। धर्म कर्म भक्ति रस लीन्हा॥
भागवत कथा जो नर सुनई। जन्म जन्म के बंधन खुनई॥

नारायण नारायण जपै। भव सागर से सहज तरै॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। मंत्र राज कहत सब देवाय॥

विष्णु सहस्रनाम नित गावै। रोग शोक दारिद्र नसावै॥
पुत्र पौत्र यश कीर्ति बढ़ावै। अंत समय वैकुण्ठहि जावै॥

॥ दोहा ॥
विष्णु चालीसा जो पढ़ै, प्रेम सहित धरि ध्यान।
सुर नर मुनि सब सुख लहैं, करैं भगति भगवान॥

Meaning

Complete Vishnu Chalisa honouring Narayana, the Dashavatara, sacred Vaishnava kshetras, Ekadashi and Tulsi devotion, with doha phalashruti.

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