चालीसा संग्रह · शिव जी

शिव चालीसा

Shiva Chalisa

Deity
Shiva
Tradition / author
Traditional
When to recite
Mondays, Pradosh, Shravan month, daily japa

Complete traditional chalisa. Forty verses in praise of Mahadev — destroyer of fear, giver of yoga and moksha.

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पाठ · Text

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतत प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नाग फनीके॥

अंग गौर शिरी कंठ बिराजै। मांगहुँ राखु भस्म लगाजै॥
वस्त्र सुंदर चितम्बर सोहे। देह रुण्ड माल नागेन्द्र मोहे॥

पंचानन त्रिनयन मन मोहा। बंग भाल चंद्र सोहै सोहा॥
शूल टंक अरु डमरु सोहे। गिरिजा अरु गनराय मन मोहे॥

नन्दीश्वर वृषभ के साजे। तिनके दसन मुख माहिं विराजे॥
मुकुट मणिमय सोहत सरै। नाना रत्न जटित अंग धरै॥

मृगछाला अंजनि अंग बिराजै। मुख पर बिभूति राजति छाजै॥
त्रिपुरारी कर माला धरै। नाग फन मणिमय सोहत सरै॥

नयन तीन अति सुंदर सोहे। भाल नेत्र अगिनि सम मोहे॥
जटा मुकुट गंगा जल धारी। शशि ललाट सोहत सुखकारी॥

गले मुण्ड माल अति सोहे। नाग अनेक बिराजत मोहे॥
नूपुर ध्वनि सुनत मन भावै। भक्तन को सुख संपति आवै॥

कर त्रिशूल अरु डमरू राजै। अरि दल दलन भक्तन सुख साजै॥
नंदी केश्वर संग बिराजै। भक्तन के संकट सब भाजै॥

कैलाश गिरि पर राज बिराजै। भक्तन के मन कामना साजै॥
पार्वती संग सुखद बिहार। गणेश कार्तिक सुत सुखकार॥

देव दानव किन्नर ध्यावैं। सिद्ध मुनीश्वर चरनहिं आवैं॥
नमन करैं सुर नर मुनि बृंदा। जय जय शंकर करुणा कंदा॥

असुर निकंदन भक्तन त्राता। करुणा सिन्धु दीनन के दाता॥
जो कोई शिव चालीसा गावै। सिद्धि मुक्ति सुख संपति पावै॥

रोग दोष संकट सब नासैं। जो यह पाठ करै मन लासैं॥
पुत्र हीन की कामना पूरी। होय सिद्ध अरु बुद्धि हजूरी॥

धन धान्य सुख संपति आवै। जो यह पढ़ै प्रेम उर लावै॥
भय निवारण करुणा सागर। शिव चालीसा सफल उजागर॥

काल भैरव रूप डरावै। भक्तन को अभय वर दावै॥
नीलकंठ विष पान करैया। जगत त्राता दुख हरन करैया॥

गंगा धार जटा में धारी। तीन लोक उजियारन हारी॥
सोमनाथ विश्वनाथ कहावै। केदारनाथ महिमा गावै॥

महाकाल उज्जैन बिराजै। ओंकारेश्वर नाम विराजै॥
वैद्यनाथ भीमशंकर स्वामी। त्र्यंबकेश्वर नागेश नामी॥

रामेश्वर घृष्णेश्वर सोहे। द्वादश ज्योतिर्लिंग विमोहे॥
जो इन नामन को नित गावै। शिव कृपा ते मुक्तिहि पावै॥

भवानी शंकर करुणा कंदा। दुख हरन भक्तन सुख मंदा॥
हर हर महादेव पुकारैं। संकट सब क्षण में टारैं॥

शिव चालीसा जो नर गावै। अष्ट सिद्धि नव निधि फल पावै॥
रामदास कहै विनती एही। शिव कृपा होय सब सुख देही॥

गंगाधर नीलकंठ कहावै। त्रिपुरारी नाम जग गावै॥
भवानीशंकर करुणा राशी। भक्तन कष्ट हरहु अब नाशी॥

काम दहन जटाधर स्वामी। मृत्युंजय नाम अति नामी॥
महामृत्युंजय मंत्र जपावै। रोग दोष भय सब नस जावै॥

लिंगाष्टक जो नर गावै। शिव लोक निश्चयहि पावै॥
रुद्राष्टक पाठ करैया। भव भय हरि सुख देवैया॥

शिवरात्रि व्रत जो नर राखै। कैलाश धाम निश्चय भाखै॥
सोमवार व्रत प्रेम से मानै। शिव कृपा ते सब सुख जानै॥

भस्म लगाय भक्ति उर धारै। नाम जपै संकट सब टारै॥
ॐ नमः शिवाय जो गावै। जन्म जन्म के पाप नसावै॥

नंदी भृंगी संग बिराजै। भक्त दुआरे राखै साजै॥
वीरभद्र रूप जब धरई। दक्ष यज्ञ भंग करि डारई॥

हालाहल कंठ में धारी। जगत त्राण हित लीला भारी॥
चंद्रमौलि गंगा जल सोहे। तीन नेत्र अग्नि सम मोहे॥

डमरू नाद सुनत मन भावै। प्रलय काल तांडव रचावै॥
सृष्टि स्थिति संहार करैया। आदि अंत मध्य सब रहैया॥

योगीश्वर ध्यान लगावैं। समाधि में शिव रूपहिं पावैं॥
ज्ञान ध्यान वैराग्य बढ़ावै। भक्ति भाव उर में बसावै॥

दीन दुखी पर दया अपारा। संकट में हो तुम रखवारा॥
बिना साधना सिद्धि न देहीं। भक्ति हीन नर दुखहिं सहेहीं॥

जो शिव चरन कमल उर धरई। काल भी ताकर भय न करई॥
रामदास विनती यह करई। शिव कृपा सब दिन बनि रहई॥

॥ दोहा ॥
शिव चालीसा जो पढ़ै, प्रेम सहित मन माहिं।
सिद्धि मुक्ति सुख पावई, संशय रहै न काहिं॥

Meaning

Complete Shiva Chalisa — praise of Mahadev’s form, Nandi, Kailasa, the twelve Jyotirlingas, and the phalashruti (fruits of recitation). Traditionally recited on Mondays, Pradosh, and in Shravan.

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