व्रत कथा संग्रह · शिव जी

प्रदोष व्रत कथा

Pradosh Vrat Katha

Deity
Shiva
Tradition / author
Puranic / traditional telling
When to recite
Trayodashi evening (Pradosh) — especially Shani & Soma Pradosh

Complete traditional vrat katha. The vow observed in the twilight hour sacred to Shiva, when darshan and aarti are especially fruitful.

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Pradosh Vrat Katha · Hindi

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पाठ · Text

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री शिवाय नमः ॥
प्रदोष व्रत की कथा — श्रद्धापूर्वक सुनें और पढ़ें।

पुराणों में कहा गया है कि प्रदोष काल — सूर्यास्त के आसपास का संध्या समय — भगवान शिव के विशेष अनुग्रह का क्षण है। इस समय शिव-पार्वती की आराधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

एक प्राचीन कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत हेतु क्षीरसागर का मंथन किया। मंथन से पहले हलाहल विष निकला, जिसकी ज्वाला से तीनों लोक व्याकुल हो उठे।

देवता भयभीत होकर कैलाश पहुँचे और शंकर भगवान की शरण ली। करुणासागर शिव ने उस विष को अपने कण्ठ में धारण कर लिया। कण्ठ नीला पड़ गया, अतः वे नीलकण्ठ कहलाए।

जगत की रक्षा का वह प्रदोष-क्षण ही भक्तों के लिए व्रत का आधार बना। तभी से त्रयोदशी की संध्या को प्रदोष कहते हुए शिव की आराधना का विधान चला आ रहा है।

प्रदोष दो मुख्य रूपों में प्रसिद्ध है — सोम प्रदोष (सोमवार) और शनि प्रदोष (शनिवार)। दोनों ही शिव-कृपा और विघ्न-नाश के लिए माने जाते हैं।

व्रत विधि: प्रातः स्नान कर शिव का स्मरण करें। दिन भर सात्त्विक संयम रखें — क्रोध, असत्य और हिंसा से दूर रहें। भोग-विलास छोड़कर मन को शांत रखें।

संध्या आने पर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें, और शिवलिंग अथवा शिव-पार्वती प्रतिमा की पूजा करें। जल, बिल्वपत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

प्रदोष काल में शिव आरती करें, पंचाक्षर मंत्र ‘नमः शिवाय’ का जाप करें, और यह कथा श्रद्धा से सुनें या पढ़ें। परिवार सहित आरती करना विशेष पुण्य माना जाता है।

व्रत समाप्ति पर शिव प्रसाद ग्रहण करें। जो सामर्थ्य के अनुसार व्रत नहीं रख सकते, वे भी संध्या में शिव-नाम जप और आरती से लाभ पा सकते हैं।

फलश्रुति: प्रदोष व्रत से पाप-ताप की शांति, रोग-भय का नाश, गृह-कलह की समाप्ति और मनोकामनाओं की सिद्धि की कामना की जाती है। भक्त शिव-कृपा से अभय पाते हैं।

जो नर-नारी श्रद्धा सहित प्रदोष व्रत करते हैं, उनकी संध्या सफल होती है और शिव-पार्वती प्रसन्न होकर कल्याण करते हैं।
॥ हर हर महादेव ॥

Meaning

Pradosh is the twilight hour sacred to Shiva. Tradition links it to Neelakantha holding the halahala poison to save the worlds. Devotees keep daytime discipline, worship Shiva–Parvati at dusk with bilva and aarti, hear the katha, and seek freedom from fear, illness, and household strife.

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