Complete traditional chalisa. Forty verses on Krishna’s leelas — from Gokul to Dwarka.
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पाठ · Text
जय श्रीकृष्ण गिरधर लाल। देत सदा भक्तन्हि प्रतिपाल॥
जेहि धरि मथुरा नगरी उजारि। कंस केसिनिस्हनिहि मारी॥
नंद जसोदा जसु बड़ भागी। तुम्हें पुत्र करि जिनि पाल्यो राखी॥
यशोदा मैया तुम्हरे जसु गावै। रोम-रोम अमिय रस पावै॥
बाल लीला अति सुखदाई। माखन चोरी की कथा सुहाई॥
कालिय नाग मर्दन कीन्हा। गोवर्धन गिरि कर उठ लीन्हा॥
ब्रज गोपी संग रास रचावै। मुरली ध्वनि सुनि सब मन भावै॥
राधा रानी संग बिहरत। वृन्दावन कुंज-कुंज विचरत॥
अक्रूर आए मथुरा लै गए। कंस वध करि जसु फैलाए॥
रुक्मिणी हरि परिणय कीन्हा। द्वारिका नगरी बसा लीन्हा॥
सुदामा के दुख दूर किए। अन्न वस्त्र धन सब कुछ दिए॥
अर्जुन को गीता ज्ञान सुनाई। धर्म क्षेत्रे कुरुक्षेत्रे गाई॥
जरासंध शिशुपाल संहारे। भक्त प्रह्लाद को अभय उतारे॥
द्रौपदी लाज राखी स्वामी। चीर बढ़ाय दिए गुण नामी॥
अजामिल उद्धार कीन्हो। गजराज को संकट हरि लीन्हो॥
मीरा भक्ति रस पान करावै। सूरदास जसु नित्य गावै॥
जय जय यशोदा नंद लला। जय जय गोपाल कृपा बाला॥
जय जय मुरली मनोहर प्यारे। जय जय वंशीवट बिहारे॥
जय जय द्वारकाधीश कहाई। जय जय जगन्नाथ गोसाई॥
जय जय गुरुवायूर अप्पा। जय जय विट्ठल पंढरपुर व्यापा॥
जो कोई कृष्ण चालीसा गावै। वैकुण्ठ धाम निश्चय पावै॥
जन्म जन्म के दुख बिसरावै। प्रेम भक्ति उर में बसावै॥
रोग शोक दारिद्र नसावै। पुत्र पौत्र सुख संपति आवै॥
जनमाष्टमी व्रत जो राखै। कृष्ण कृपा ते मुक्तिहि भाखै॥
राधा नाम संग जो गावै। दोनों चरणन शीश नवावै॥
हरे कृष्ण हरे राम जपै। भव सागर से सहज तरै॥
तुलसी दास कहै कर जोरी। श्रीकृष्ण चरन मन बसि मोरी॥
कृष्ण चालीसा फल कहि दीन्हा। जो नर पढ़ै सोई सुख लीन्हा॥
माखन चोर नांव तिहारा। जसोदा मैया को प्यारा॥
चीर हरन की लीला गाई। गोपी प्रेम भक्ति दर्शाई॥
अघासुर बकासुर संहारे। पूतना को भी भस्म उतारे॥
त्रिणावर्त शकटासुर मारे। ब्रज रखवारी लीला सारे॥
दान लीला परिक्रमा गावै। मान भंज राधा रस पावै॥
होली रंग ब्रज में छावै। बांसुरी तान सुनावै॥
सुदामा तंदुल ले आए। कृष्ण ने राज सुखहिं दिखाए॥
मित्र धर्म की रीति निभाई। दीनन प्रति अति दया दिखाई॥
कुरुक्षेत्र में गीता सुनाई। कर्म योग भक्ति समझाई॥
नरोत्तम भक्त उबारै। शरणागत कबहुँ न टारै॥
जगन्नाथ रूप पुरी सोहे। रथ यात्रा जग में मोहे॥
गुरुवायूर अप्पन कहावै। उडुपी कृष्ण दर्शन पावै॥
नाथद्वारा श्रीनाथजी। गोविंद देव जयपुर रमी॥
बांके बिहारी वृंदावन। प्रेम मंदिर ज्योति पावन॥
हरे राम हरे कृष्ण जपै। निद्रा में भी नाम न छपै॥
कलियुग एक नाम आधार। कृष्ण कृपा ते उतरै पार॥
जन्माष्टमी व्रत विधि मानै। झूलन झांकी संग जानै॥
मक्खन दही दूध भोग धरई। मध्यरात्रि आरती करई॥
राधा कृष्ण जुगल रूपा। प्रेम भक्ति रस अनुपा॥
जो यह जुगल नामहि गावै। गोलोक धाम निश्चय पावै॥
गोपाल गोविंद मुकुंद मुरारी। राधा रमण यशोदा प्यारी॥
नटवर नागर बांसुरी वाले। ब्रज रज नैनन में पाले॥
॥ दोहा ॥
कृष्ण चालीसा प्रेम से, जो नर पढ़ै सुजान।
राधा संग कृपालु प्रभु, बसहु हृदय मसान॥
Meaning
Complete Krishna Chalisa covering childhood leelas, Kamsa-vadha, Dwarka, Gita, and famous Krishna kshetras, ending with doha.