व्रत कथा संग्रह · कृष्ण जी

जन्माष्टमी व्रत कथा

Janmashtami Vrat Katha

Deity
Krishna
Tradition / author
Bhagavata Purana tradition
When to recite
Krishna Janmashtami (Bhadrapada Krishna Ashtami)

Complete traditional vrat katha. The birth story of Krishna in Mathura prison — and the vow devotees keep until midnight darshan.

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Janmashtami Vrat Katha · Hindi

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पाठ · Text

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ श्री कृष्णाय नमः ॥
जन्माष्टमी व्रत कथा — भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य।

द्वापर युग में मथुरा में कंस का अत्याचार बढ़ गया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने देवकी-वसुदेव के पुत्र रूप में अवतार लिया।

आषाढ़/श्रावण कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कारागार के द्वार स्वयं खुल गए, यमुना ने मार्ग दिया, और वसुदेव जी बालक को गोकुल ले गए।

नंद-यशोदा के घर बाल गोपाल पले। उन्होंने पूतना, तृणावर्त आदि असुरों का नाश किया, और कालान्तर में कंस-वध कर धर्म की रक्षा की।

जन्माष्टमी व्रत उसी दिव्य जन्म की स्मृति है। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं, मंदिर सजाते हैं, झूलन-झूला और मध्यरात्रि आरती करते हैं।

व्रत विधि: प्रातः स्नान-संकल्प। दिन भर कृष्ण-नाम जप, भागवत कथा और भजन। सात्त्विक भाव से बाल गोपाल की पूजा — मक्खन, मिष्ठान्न, तुलसी अर्पण।

संध्या से मध्यरात्रि तक कीर्तन और कथा। ठीक जन्माष्टमी काल में आरती, ‘जन्माष्टमी की जय’ और लोरी-भजन गाएँ।

व्रत के बाद प्रसाद वितरण करें। गौ-सेवा, बालकों को मिठाई और दीनों को दान विशेष पुण्य माना जाता है।

फलश्रुति: जन्माष्टमी व्रत से भक्ति बढ़ती है, घर में आनंद आता है, और कृष्ण-कृपा से जीवन के विघ्न दूर होते हैं।

जो नर-नारी प्रेम से जन्माष्टमी मनाते हैं, वे गोकुल-मथुरा की लीला को हृदय में बसा लेते हैं।
॥ जय श्री राधे कृष्ण ॥

Meaning

Janmashtami celebrates Krishna’s midnight birth in Mathura and his protection in Gokul. Devotees fast, sing bhajans, swing the cradle of Bal Gopal, perform midnight aarti, and share prasadam — praying for devotion and joy in the home.

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