चालीसा संग्रह · अय्यप्पा स्वामी

अय्यप्पा चालीसा

Ayyappa Chalisa

Deity
Ayyappa
Tradition / author
Modern popular devotion (traditional style)
When to recite
Mandala vrata days; before Sabarimala yatra

Complete traditional chalisa. A popular chalisa-style praise of Dharma Sastha Ayyappa for pilgrims on the path.

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पाठ · Text

जय जय अय्यप्पा स्वामी दयाला। शबरी गिरि के वास कृपाला॥
हरिहर आत्मज भक्तन त्राता। पम्पा तीर बिराज विधाता॥

शबरिमलै निवास सुखदाई। अठारह पायड़ी की महिमा गाई॥
इरुमुडि केट्टू धारण करैया। मण्डल व्रत रक्षक अच्युत॥

काले वस्त्र धरे भक्त आवैं। स्वामिये शरणम् अय्यप्पा गावैं॥
कन्याकुमारी से ले केरल। अय्यप्पा भक्ति जगत विशाल॥

धर्मशास्ता नाम तिहारा। दुष्ट दलन भक्तन सुखकारा॥
मणि कण्डन लीला अति न्यारी। भक्तन के संकट हरन हारी॥

पम्पा सरोवर स्नान करावै। शबरिमलै दर्शन सुखदावै॥
मकरविलक्कु ज्योति दिखावै। भक्त हृदय में प्रेम जगावै॥

जय जय अय्यप्पा करुणा कंदा। दीनन के तुम हो सुख मंदा॥
विघ्न हरो अरु भक्ति बढ़ाओ। शबरी पथ पर पार लगाओ॥

जो कोई अय्यप्पा चालीसा गावै। भव भय दूर मुक्ति फल पावै॥
रोग शोक संकट सब नासैं। जो यह पाठ करै उर लासैं॥

पुत्र पौत्र सुख संपति देई। शत्रु मित्र सब होय सनेही॥
मण्डल व्रत जो नर राखै। अय्यप्पा कृपा ते मुक्तिहि भाखै॥

शरणम् अय्यप्पा जप जो गावै। स्वामी कृपा निश्चय आवै॥
तुलसी दास कहै कर जोरी। अय्यप्पा चरन मन बसि मोरी॥

पम्पा सरोवर तीर सुहावै। शबरी गिरि चढ़ि भक्तन आवै॥
नेली थोट्टम से पथ पावै। अप्पची मेडु पर विश्राम लावै॥

एरामेली गणपति पूजै। कोट्टयम पम्पा स्नानहि सूजै॥
त्रिवेणी संगम पाप नसावै। इरुमुडि बंधन विधिहि बतावै॥

सरनम् अय्यप्पा जपै निरंतर। माला जपै मन होय पवित्र॥
ब्रह्मचर्य व्रत दृढ़ धरैया। काले वस्त्र तिलक उर करैया॥

अठारह पायड़ी चढ़ि जब आवै। स्वामी सन्निधान दर्शन पावै॥
गोपुरम द्वार पर प्रेम दिखावै। हरिवर आसन आरती गावै॥

मणिमुडी माला गले बिराजै। भस्म तिलक भाल पर छाजै॥
नारियल गुड़ घी प्रसाद धरै। नीराजन दीप आरती करै॥

मकरविलक्कु ज्योति जब जगै। भक्त हृदय आनंद उमगै॥
पोंगाला पूजा विधि जो मानै। स्वामी कृपा सब दिनहि जानै॥

धर्मशास्ता नाम अति प्यारा। हरिहर पुत्र जगत उजियारा॥
मणि कण्डन लीला जसु गावै। महिषी असुर दलनहि छावै॥

वेम्बायालिल जन्म तिहारा। पंथाळम राजा पालन हारा॥
शबरि गोत्र कन्या के आश्रम। लीला रची अय्यप्पा सुधाम॥

काळी यक्षिणी संग बिराजै। भक्तन रक्षा नित्यहि साजै॥
ववर स्वामी संग मित्रता। मुस्लिम भक्ति की रीत बता॥

कन्याकुमारी से केरल देश। अय्यप्पा भक्ति अटल अशेष॥
तमिलनाडु कर्नाट आवैं। आंध्र तेलंग भी दर्शन पावैं॥

मण्डल काल चालीस दिन। व्रत नियम से शुद्धहि मन॥
दीपाराधन नित्यहि करै। स्वामीये शरणम् मुख से धरै॥

॥ दोहा ॥
अय्यप्पा चालीसा प्रेम से, जो नर पढ़ै सुजान।
शबरिमलै स्वामी कृपा करैं, होय भक्त कल्याण॥
स्वामीये शरणं अय्यप्पा॥

Meaning

Complete Ayyappa Chalisa-style praise for Mandala pilgrims — Sabarimala, eighteen steps, irumudi, Makaravilakku, and saranam japa, with doha.

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